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prapathi/mangaLAsAsanam - Hindi

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वानमामलै जीयर मंगलाशाशन

  1. मै ऐसे श्री वानमामलै जीय़र के चरणकमलों का आश्रय लेत हूँ जो श्री मणवाळमामुनि के कृपायुक्त है , जो स्वयम करुनासागर है, जो दिव्यहृदयी है, जिन्मे जन्मसे हि दिव्यमंगललक्षण है और जो स्वयमरूप से अळगीय वरदर है ।
  2. मेरी आराधना सिर्फ़ और सिर्फ़ श्री रामानुजजीयर के लिये है क्योंकि वह जीयरस्वामियों के और हमारे सांप्रदाय के अभिनेता है , और श्रीमणवाळमामुनि के कृपा से सारे सद्गुणों का समावेश है ।
  3. मै ऐसे श्री ऱामानुज जीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जो स्वयम श्री मामुनि के चरणकमलों मेइ मधु-मक्खि के तरह है और जो पूर्ण चन्द्रमा की तरह मेरे मनको हर्षित करते है ।
  4. मै ऐसे श्री रामानुज जीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जो वात्सल्य, शील / चरित्र और ज्ञान जैसे सद्गुणो के सागर है और जिन्को श्री मणवाळमामुनि जीवन देने वाले सांस की तरह उन्को मानते है ।
  5. मै ऐसे श्री वानमामलै जीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जिन्होने ब्रह्मचर्य से सीधे संयास लिये और गृहस्थाश्रं और वानप्रस्थाश्रं को शर्मिन्दगि का एहसास दिलाये ।
  6. मै ऐसे श्री वानमामलै जीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जो प्रथम है जिन्हे श्री मामुनिगल् के कृपा और आशीर्वाद की सम्प्राप्ति हुई और जो अपने कृपा से काम जैसे कई दोशो से हमे विमुक्ति दिलाते है ।
  7. मै ऐसे श्री वानमामलै जीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जो स्वयम अनन्त सद्गुणोके धारक है और जो भौतिक संसार के इच्छावों और अनिच्छवोंसे विमुक्त है और जो स्वयम अरविन्द दलयताक्ष है ।
  8. मै ऐसे रामानुजजीयर को देखकर बहुत आनंद महसूस करता हूँ क्योंकि वैराग्य कि लता जो हनुमान मे सबसे पहले विकसित हुआ , वही भीष्म पितामह मे और भी विकसित होकर बढ़ा और पूर्ण तरह श्री रामानुजजीयर मे विकसित होकर प्रफुल्लित हुआ ।
  9. मै ऐसे रामानुजजीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जिनके उभयवेदान्त उपंयास बड़े अच्छे विदवानों आकर्शित होते है , जिनका स्वभाव और अनुशीलन सर्वोत्कृष्ट है और वही अनुशीलन संयासि करते है , जो दोष रहित है , जो संपूर्ण ज्ञान और सद्गुणो से भरपूर है और जिन्होने श्रीमणवालमामुनि के चरणकमलों का आश्रय लिया है ।
  10. मै ऐसे रामानुजजीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जिनके उपंयास मे पशु-पक्षि घोषणा करते है की - श्रीमन्नारायण प्रधान (सर्वोच्च) है और अन्य देवता उनकी शेषी है ।
  11. मै ऐसे रामानुजजीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जिनके नयन कटाक्ष से अर्थपञ्च के ज्ञान की प्राप्ति होती है , जिन्होने कई सारे कैंकर्य (सेवा) वानमामलै दिव्यदेश मे किया और जो शिष्यों के लिये एक कल्पवृक्ष थे ।
  12. मै ऐसे रामानुजजीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जिन्होने अपने शुध्द दिव्य कृपा से मुझे भगवद्-भागवत कैंकर्य मे संलग्न किया (यानि परिवर्तन/सुधार किया जो इस भौतिक जगत के आनंद मे संलग्न था और जिसे (मुझमे) श्रीवैष्णवों के प्रती कदाचित रुचि नही थी)
  13. मै ऐसे रामानुजजीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जो ज्ञान के भण्डार है , जिनकी वजह से वैराग्य शान्ति पूर्वक विश्राम ले रहा है , जो एक कीमती खज़ाना के पेटी की तरह है और जो सत्-साम्प्रदाय के अगले उत्ताराधिकारि (जिसे श्री एम्पेरुमानार ने खुद स्थापित किया) के काबिल और सक्षम है ।
  14. मै ऐसे रामानुजजीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जिनमे श्रीमामुनि की कृपा का समावेश है , जो सद्गुणों के भण्डार है और दैवनायकन एम्पेरुमान के प्रति जिन्हे असीमित लगाव था ।

वानमामलै जीयर प्रपत्ति

1) मै ऐसे श्री वानमामलै जीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जो एक खिले हुए फूल की तरह सुंदर है , जिन्हें देखर नयनानंद की प्रप्ति होती है , जो हमे इस भवसागर के जाल से बचा सकते है ।

2) मै ऐसे श्री वानमामलै जीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जिन्होनें यश और कीर्ती श्री मणवाळमामुनि के दिव्यानुग्रह से प्राप्त की , जो हमारे कमियों को नष्ट करने मे सक्षम है , जो शिष्यों के लिये एक कल्पवृक्ष है और जो सद्गुणों के सागर है ।

3) मै ऐसे श्री वानमामलै जीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जिन्होनें श्री मणवाळमामुनि के चरणकमलों का आश्रय लिया है और वह किसी भी कारण गृहस्थाश्रम मे नही पडे क्योंकि गृहस्थाश्रम इस भौतिक जगत के भवसागर मे उन्हें बाँन्ध देगा ।

4) मै ऐसे श्री वानमामलै जीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जिनमे विरक्तिभावलता (जो हनूमान से शुरू हुई थी) वह अब परिपूर्ण होकर उन्में परिव्याप्त हुई ।

5) मै ऐसे श्री वानमामलै जीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जिन्होनें अपने आचार्य की सेवा मे बहुत सारे मण्डपों का निर्माण और उनका अभिनेतृत्व वानमामलै मे किया जैसे आदिशेष भगवान के लिये करते है ।

6) मै ऐसे श्री वानमामलै जीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जिन्होनें नम्माळ्वार के दिव्य पासुरों का गहरावेदान्तार्थ बहुत ही सरल भाषा मे प्रस्तुत किया ।

7) मै ऐसे श्री वानमामलै जीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जिनका नाम इस भौतिक जगत के भवसागर सर्प को विनाश कर सकता है और बध्दजीवात्मावों को भगवान के समान उत्थापन होता है ।

8) मै ऐसे श्री वानमामलै जीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जो हमे हमारे अंगिनत जन्मों मे किये गये पापों/दुष्कर्मो से विमुक्त करने मे सक्षम है , और जिन चरणों को साधुजन सदैव पूजा करते है ।

9) मै ऐसे श्री वानमामलै जीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जिनका श्री पादतीर्थ (चरणामृत) किसी को भी शुध्द कर सकती है और तापत्रय की ज्वाला को पूर्ण तरह से नष्ट करती है ।

10) मै ऐसे श्री वानमामलै जीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जो शुध्द और सद्गुणों के सागर है और जिनका आश्रय श्री अप्पाचियाराण्णा ने लिया था |

11) मै ऐसे श्री वानमामलै जीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जो शुध्द और सद्गुणों की चोटी है और जिनका आश्रय समरभुन्गवाचार्यर ने लिया था और उनके चरण साधुजन सदैव पूजा करते है ।

12 ) मै ऐसे श्री वानमामलै जीयर के चरणकमलों का आश्रय लेता हूँ जिनका वैराग्य हनुमान भीष्म पितामह इत्यादि से सर्वाधिक है , उनकी भक्ति ओराण्वाळिआचार्यों के बराबर थी , उनका ज्ञान श्रीनाथमुनि यामुनमुनि के बराबर थी और ऐसी तुलना मे कौन वानमामलै जीयर से सर्वोत्तम हो सकता है ।

13) उन्होनें श्रीदैवनायकन एम्पेरुमान की सेवा आदिशेष की तरह किया । उन्होनें भगवान के भक्तों का गुणगान कुळशेखराळ्वार की तरह किया । उन्होनें अपने आचार्य श्री मणवाळमामुनि को पूजा जैसे श्री मधुरकविआळ्वार ने श्री नम्माळ्वार को पूजा । उन्होनें पूर्वाचार्यों के पदचाप के राह मे चले और सद्गुणों के धारक हुए |

14) बहुत पहले श्री एम्पेरुमान ने नर-नारायण का अवतार लिया था अब वही एम्पेरुमान श्री मणवाळमामुनि और वानमामलै जीयर के रूप मे प्रकट हुए । कुछ इस प्रकार श्री वानमामलै जीयर का कीर्ती / यश था ।


अडियेन सेतलूर सीरिय श्रीहर्ष केशव कार्तीक रामानुज दासन् और अडियेन वैजयन्त्याण्डाळ् रामानुज दासि

Copied from: http://guruparamparaihindi.wordpress.com/2013/09/28/ponnadikkaljiyar/